OPEC Oil Price : कच्चे तेल की कीमत में उछाल, OPEC+ के फैसले ने मचाया हलचल

OPEC Oil Price : सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1% की बढ़त देखी गई। इसकी सबसे बड़ी वजह बनी OPEC+ की मीटिंग में लिया गया फैसला, जिसमें संगठन ने नवंबर से तेल उत्पादन में सिर्फ 1.37 लाख बैरल प्रतिदिन की मामूली बढ़ोतरी करने की घोषणा की।
OPEC+ ने क्यों लिया ऐसा फैसला?
OPEC+ (जिसमें सऊदी अरब, रूस समेत कई तेल उत्पादक देश शामिल हैं) के इस फैसले को एक संतुलित और सतर्क कदम माना जा रहा है। मौजूदा समय में दुनियाभर में तेल की मांग और सप्लाई दोनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में संगठन नहीं चाहता कि बाजार में ज्यादा तेल आने से कीमतें और गिर जाएं।
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कीमतों में कैसे आया उछाल?
इस फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए। जिससे लोगों को काफी परेशान होता हुआ देख गया।
ब्रेंट क्रूड 63 सेंट चढ़कर 65.16 डॉलर प्रति बैरल हो गया।वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 58 सेंट की बढ़त के साथ 61.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का क्या कहना है ?
विश्लेषक टीना टेंग का मानना है कि कीमतों में यह उछाल सीमित उत्पादन बढ़ोतरी की वजह से आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती को देखते हुए तेल की कीमतों में आगे स्थिरता नहीं रहेगी।
OPEC Oil Price:
रूस और सऊदी अरब में मतभेद :
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, OPEC+ के अंदर भी पूरी सहमति नहीं थी।
रूस चाहता था कि उत्पादन में सिर्फ थोड़ी बढ़ोतरी की जाए ताकि कीमतें न गिरें।जबकि सऊदी अरब ज्यादा उत्पादन के पक्ष में था ताकि वह बाजार में अपनी हिस्सेदारी फिर से बढ़ा सके।इसके अलावा रूस और ईरान पर लगे प्रतिबंध, यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुविधाओं पर हुए हमलों के चलते सप्लाई में बाधा आ सकती है। यही वजह है कि OPEC+ कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और तेल बाज़ार को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। अगर खपत बहुत ज्यादा बढ़ गया तो भी ये मुनाफा ज्यादा कमा लेंगे और घाटे का तो कोई सवाल ही नहीं है।

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G7 देशों की सख्ती :
इस बीच G7 देशों के वित्त मंत्रियों ने भी यह साफ किया है कि वे रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए उन देशों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे जो अब भी रूसी तेल खरीद रहे हैं या प्रतिबंधों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
OPEC Oil Price:
• अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) :
1. OPEC+ क्या है?
OPEC+ एक संगठन है जिसमें OPEC देशों (जैसे सऊदी अरब, इराक) के अलावा रूस जैसे गैर-OPEC देश भी शामिल हैं। यह समूह मिलकर तेल उत्पादन की नीतियां तय करता है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें स्थिर बनी रहें और हरेक देश की जनता को इसका लाभ मिल सके।
2. OPEC+ ने तेल उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी की है?
OPEC+ ने नवंबर से 1.37 लाख बैरल प्रतिदिन की मामूली बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
3. इससे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1% की बढ़ोतरी हुई है।
4. रूस और सऊदी अरब के बीच मतभेद क्यों हैं?
रूस चाहता है कि उत्पादन सीमित रहे ताकि कीमतें गिरें नहीं, जबकि सऊदी अरब उत्पादन बढ़ाकर अपनी बाजार हिस्सेदारी वापस पाना चाहता है।
5. क्या आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों की वजह से तेल की कीमतें अस्थिर रह सकती हैं।