Surge in Price of Gold :त्योहार से लेकर विदेशी मुद्रा तक जब सोने की क़ीमतें बढ़ती हैं, भारत की उलझन भी बढ़ती है

Surge in Price of Gold :
आजकल दुनिया में सोने की कीमतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। लोग और देश दोनों अब सोने को एक सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि सोना एक ऐसा धातु है जो: बहुत दुर्लभ (rare) होता है,
इसे न तो आसानी से बनाया जा सकता है,
और न ही इसकी मात्रा अचानक बढ़ाई जा सकती है।इसलिए जब दुनिया में आर्थिक तनाव या महंगाई बढ़ती है, तब लोग पैसे की जगह सोने में निवेश करना पसंद करते हैं।
दुनियाभर के देश क्यों खरीद रहे हैं सोना?
दुनिया के केंद्रीय बैंक (Central Banks) — जैसे हमारे देश का RBI — अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में सोने को ज़्यादा शामिल कर रहे हैं।
एक सर्वे में पता चला कि:
95% केंद्रीय बैंक अगले 1 साल में और सोना खरीदने की सोच रहे हैं।
लगभग 75% बैंक डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
इसका मतलब है कि दुनिया का आर्थिक संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है, और सोने की मांग बढ़ रही है।
Surge in Price of Gold :त्योहार से लेकर विदेशी मुद्रा तक – जब सोने की क़ीमतें बढ़ती हैं, भारत की उलझन भी बढ़ती है:
भारत में सोना क्यों इतना खास है?
भारत में सोने का बहुत गहरा रिश्ता है — सिर्फ पैसे या निवेश के तौर पर नहीं, बल्कि धार्मिक, पारंपरिक और सामाजिक रूप से भी।
शादियों में दूल्हा-दुल्हन को सोना दिया जाता है।
त्योहारों में लोग सोना खरीदते हैं (जैसे धनतेरस, अक्षय तृतीया)।
महिलाएँ आभूषण पहनती हैं, जो पारिवारिक विरासत भी माने जाते हैं।
लेकिन दिक्कत ये है कि भारत अपना सोना खुद नहीं बनाता। हम लगभग 70%–80% सोना विदेशों से खरीदते (import) हैं।
जब सोना महंगा होता है, भारत को नुकसान कैसे होता है?
जैसे-जैसे सोने की कीमतें बढ़ती हैं, भारत को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है:
ज़्यादा पैसा विदेश भेजना पड़ता है।
2024-25 में भारत ने करीब 58 अरब डॉलर का सोना मंगवाया, जबकि पहले ये 28 अरब डॉलर था।
रुपये की कीमत गिरती है-
जब ज़्यादा डॉलर की ज़रूरत होती है, तो भारतीय रुपया कमजोर हो जाता है।
जैसे जून 2025 में 1 डॉलर = ₹85.90 था, लेकिन सितंबर तक ₹88.28 हो गया।
घरेलू सोना महंगा हो जाता है
आम लोगों के लिए गहने खरीदना मुश्किल हो जाता है।
Surge in Price of Gold :त्योहार से लेकर विदेशी मुद्रा तक – जब सोने की क़ीमतें बढ़ती हैं, भारत की उलझन भी बढ़ती है:
सरकार के कदम :
भारत सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं ताकि सोने का आयात कम हो:
कुछ कंपनियों को सोना मंगाने की इजाज़त नहीं दी।
टैक्स और लिमिट लगाई।
लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे डिजिटल गोल्ड, गोल्ड बॉन्ड और ETF जैसे विकल्प अपनाएं।
पर फिर भी, जब शादी-ब्याह और त्योहारों का समय आता है, लोग ज़्यादा सोना खरीदते हैं।
जुलाई से अगस्त 2025 में सोने का आयात एक बार फिर बढ़ गया — अगस्त में 5.44 अरब डॉलर का सोना मंगाया गया।

असली दिक्कत क्या है?
भारत की दुविधा यह है कि:
एक तरफ़ लोगों को सोना बहुत पसंद है — ये हमारी परंपरा और भावना से जुड़ा है।
दूसरी तरफ़ जब हम ज़्यादा सोना विदेश से मंगाते हैं, तो देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ता है।
इससे सरकार और RBI को सोचना पड़ता है कि कैसे लोगों की भावनाओं को भी समझा जाए?
और कैसे देश की आर्थिक सेहत को भी सुधारा जाए?
निष्कर्ष :
सोने की बढ़ती कीमतें सिर्फ़ बाज़ार की बात नहीं हैं, ये भारत जैसे देश में एक संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था — तीनों से जुड़ी बात है।
Surge in Price of Gold :त्योहार से लेकर विदेशी मुद्रा तक – जब सोने की क़ीमतें बढ़ती हैं, भारत की उलझन भी बढ़ती है:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):
1. सोने की कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही हैं?
जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता (जैसे युद्ध, मंदी, या डॉलर की कमजोरी) होती है, तो निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित जगह लगाना चाहते हैं।
सोना एक ऐसा विकल्प है जिसे लोग “सुरक्षित निवेश” मानते हैं। इसी कारण इसकी मांग बढ़ती है, और कीमतें ऊपर जाती हैं।
2. भारत अपना सोना खुद क्यों नहीं बनाता?
भारत में सोने की खुदाई बहुत ही सीमित मात्रा में होती है।
भारत की ज़रूरत का ज़्यादातर सोना दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है, जैसे दुबई, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका आदि से।
3. सोने का आयात बढ़ने से देश को क्या नुकसान होता है?
जब हम ज़्यादा सोना विदेश से खरीदते हैं तो हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार घटता है।
रुपया कमजोर हो जाता है। देश का व्यापार घाटा (trade deficit) बढ़ता है।
4. सरकार सोने का आयात कैसे नियंत्रित करती है?
सरकार कुछ उपाय अपनाती है ।सोने पर आयात शुल्क बढ़ा देती है।
कुछ खास एजेंसियों को ही सोना मंगाने की अनुमति देती है।
डिजिटल और वित्तीय विकल्पों (जैसे गोल्ड बॉन्ड) को बढ़ावा देती है।
5. लोग फिजिकल सोने की जगह डिजिटल गोल्ड या गोल्ड बॉन्ड क्यों लें?
क्योंकि यह सुरक्षित होता है ।इसमें ब्याज भी मिलता है ।
इसे कभी भी बेचा या ट्रांसफर किया जा सकता है।
टैक्स छूट जैसे फायदे भी मिल सकते हैं।
6. क्या त्योहारों का सोने की कीमतों पर असर पड़ता है?
हां, बिल्कुल।
भारत में त्योहारों (धनतेरस, दीवाली, अक्षय तृतीया) और शादियों के समय सोने की मांग बहुत बढ़ जाती है, जिससे कीमतें और ऊपर चली जाती हैं।
7. क्या सोने में निवेश करना आज भी फायदेमंद है?
दीर्घकाल में सोना एक स्थिर और सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन आजकल डिजिटल विकल्पों (जैसे गोल्ड ETFs, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड) के साथ, निवेश और भी सुविधाजनक हो गया है।
8. भारत सरकार कौन-कौन से गोल्ड निवेश विकल्प देती है?
सरकार द्वारा दिए गए कुछ प्रमुख विकल्प हैं:
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)
गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम
डिजिटल गोल्ड (Paytm, PhonePe जैसे प्लेटफॉर्म पर)
गोल्ड ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स)
Surge in Price of Gold:त्योहार से लेकर विदेशी मुद्रा तक – जब सोने की क़ीमतें बढ़ती हैं, भारत की उलझन भी बढ़ती है।